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Showing posts from March, 2021

कविता कब होती है

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 *कविता कब होती है* कभी किनारे पर बैठ कर, जब साँझ अलविदा कहने को हो, आपने देखा है कि लहरें रेत पर एक खोई हुई प्रेयसी की तरह बार बार क्या लिखती व मिटाती रहती हैं । क्या डाल पर बैठे पंछी अपने कलरव से प्रकृति का भान कराते हैं या ऊपर बैठ कुछ बता रहे हैं जो विज्ञान ने हमारी आंखें खोल समझने योग्य नहीं छोड़ा। तारों पर दौड़ती बारिश की बूंदें क्या बच्चों जैसे एक ही स्थान पर कूदने की कोशिश करती हैं। औऱ सूरज भीरु सा धीरे धीरे समंदर के तले से निकल पहाड़ों के पीछे छुपते छुपाते आसमान में आता है। पत्तों पर लिखीं सभी इबारतें पढ़ता है और उस दिन का फ़ैसला बड़ी संजीदगी से करना तय करता है पर बहुत लंबी फ़ेहरिस्त है काम की औऱ पूरा एक दिन भी नहीं उसके पास  सबको इंसाफ़ कैसे दे पायेगा जबकि बक़ाया मामलों में अभी सुनवाई भी नहीं शुरु हुई । मामले ऐसे ही मुंतवी होते रहते हैं। क्या कर सकता है सूरज ऐसे हालात में क्यूँ दिनभर का थका हारा सूरज किस से मिलने के लिए इतना बेताब होने लगता है कि जल्दबाज़ी में वह अपना कुछ सोना समन्दर में पिघला हुआ छोड़ कर रोज़ उससे मिलने की फ़िराक़ में रहता है? ये हवायें जो ख़ुशबू लिए खेतों औऱ जंगलो...

विवेचना रंगों की

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 *विवेचना रंगों की* सखी मोहे श्याम रंग है भाये, फलां रंग आप पर ख़ूब जंचता है, मन मैला न करें, दिल काला है, तबियत हरी होना, गुस्से से लाल पीला होना इत्यादि सही में तो हमारी प्रारंभिक सोच निर्मल जल सी होती है जैसा रंग उसमें मिलाते जाते हैं वैसा वो दिखाई देने लगता है कौन सा रंग मिला रहे हैं यह भी किस के संपर्क में आये और कितना प्रभावित हुए  इसका शिक्षा से नहीं आपके विवेक से इसका सम्बंध है आपके विवेक को शिक्षा कितना जागृत कर पाई या शिक्षा हमारी तर्क शक्ति को ही विकसित या/और विकृत कर पाई. क्या समय रहते हम त्वचा के रंग से कुत्सित सोच को बदल पाये या अंग्रेजी शासन में गोरे रंग से अभी भी जुड़े हैं यदि आप गौर फरमायें तो पायेंगे कि दूध सा सफ़ेद रंग शांति से जोड़ा जाता, बर्फ़ जैसी निष्ठुरता से, कफ़न से, आँखों की सीमा बांधते कोहरे से, दूधिया उजाले से, रंग खोते रिश्तों में सफ़ेद होते ख़ून से, परिपक्वता व पकते बालों से जो चांदी से भी हो सकते हैं, पभु के चरणों में अप्रतिम प्रकाश से आदि वहीँ काले रंग को अपराध, काले दिल से, दाल में काला से, खोट से, सूनसान काली रात के भय से, कज़रारे नयनों से, ज़ुल्फ़ों से,...